दमयन्ती–बाहुकसंवादः
Damayantī’s Dialogue with Bāhuka; Recognition and Disclosure
प्राणयात्रां परिप्रेप्सो: शकुनैर््तवासस: । आधिभिर्दह्युमानस्य श्यामा न क्रोद्धुमहति,जीविका पानेके लिये चेष्टा करते समय पक्षियोंने जिसके वस्त्रका अपहरण कर लिया था और जो अनेक प्रकारकी मानसिक चिन्ताओंसे दग्ध हो रहा था, उस पुरुषपर श्यामाको क्रोध नहीं करना चाहिये
「生きる糧を求めて奔走する折、鳥どもが彼の衣を奪い去り、彼はさまざまな憂いに焼かれていた。ゆえにシャーマーはその男を怒るべきではない。」
बाहुक उवाच