दमयन्ती–बाहुकसंवादः
Damayantī’s Dialogue with Bāhuka; Recognition and Disclosure
विषमस्थेन मूढेन परिगभ्रष्टसुखेन च । यत् सा तेन परित्यक्ता तत्र न क्रोद्धुमहति,वह पुरुष बड़े संकटमें था तथा सुखके साधनोंसे वज्चित होकर किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया था। ऐसी दशामें यदि उसने अपनी पत्नीका परित्याग किया है, तो इसके लिये पत्नीको उसपर क्रोध नहीं करना चाहिये
「その男は大いなる窮地にあり、愚かにも迷い、安楽とその手立てを失っていた。かかる有様で彼が妻を捨てたのなら、妻は彼を怒るべきではない。」
बाहुक उवाच