अक्षहृदय-विद्या-प्रदानम्
Transmission of Akṣa-hṛdaya; Kali’s Exit and the Bibhītaka Refuge
विषमस्थेन मूढेन परिगभ्रष्टसुखेन च । यत् सा तेन परित्यक्ता तत्र न क्रोद्धुमहति,“वह पुरुष बड़े संकटमें था, सुखके साधनोंसे वंचित होकर किंकर्तव्यविमूढ हो गया था। ऐसी दशामें यदि उसने अपनी पत्नीका परित्याग किया है तो इसके लिये पत्नीको उसपर क्रोध नहीं करना चाहिये
その男は大いなる窮地にあり、安楽の手立てを失って、何をなすべきかも分からぬまま愚かに惑っていた。かかる境遇で妻を捨てたのなら、妻は彼に怒りを向けるべきではない。
बृहदश्च उवाच