अक्षहृदय-विद्या-प्रदानम्
Transmission of Akṣa-hṛdaya; Kali’s Exit and the Bibhītaka Refuge
प्राणयात्रां परिप्रेप्सो: शकुनै््तवासस: । आधिभिर्दह्यमानस्य श्यामा न क्रोद्धुमहति,“जीविका पानेके लिये चेष्टा करते समय पक्षियोंने जिसके वस्त्रका अपहरण कर लिया था और जो अनेक प्रकारकी मानसिक चिन्ताओंसे दग्ध हो रहा था, उस पुरुषपर श्यामाको क्रोध नहीं करना चाहिये
命をつなぐ糧を求めて奔走していた折、鳥どもが彼の衣を奪い去り、さらに種々の憂いが胸を焼いていた。ゆえにシャーマーはその男に怒るべきではない。
बृहदश्च उवाच