कौशिकस्य क्रोधविनिवृत्तिः — Kauśika’s Anger Checked by Householder Dharma
सेदुको वृषदर्भस्य बालस्यैव उपांशुव्रतम भ्यजानात् कुप्यमदेयं ब्राह्मणस्य,“वृषदर्भने बचपनसे ही एक गुप्त व्रत ले रखा था कि “ब्राह्मणको सोना-चाँदीके सिवा और कुछ नहीं देना चाहिये (तात्पर्य यह कि उसे सुवर्ण तथा रजत ही प्रदान करना चाहिये)”। उनके इस व्रतको सेदुक जानते थे
セドゥカは知っていた。ヴリシャダルバが幼少の頃より密かに誓いを立てていたことを——「婆羅門には金銀以外のものを与えてはならぬ」という誓いである。
वैशम्पायन उवाच