भरद्वाजपुत्रवधः
The Slaying of Bharadvāja’s Son and the Sage’s Lament
भरद्वाज उवाच ब्राह्मणानां किलार्थाय ननु त्वं तप्तवांस्तप: | द्विजानामनथधीता वै वेदा: सम्प्रतिभान्त्विति,भरद्वाजने कहा--बेटा! तुमने ब्राह्मणोंके हितके लिये भारी तपस्या की थी। तुम्हारी तपस्याका यह उद्देश्य था कि द्विजोंको बिना पढ़े ही सब वेदोंका ज्ञान हो जाय
バラドヴァージャは言った。「我が子よ!汝はブラーフマナたちの益のために、苛烈な苦行(tapas)を修めた。汝の苦行の目的は、二度生まれの者(dvija)が学ばずして、すべてのヴェーダの知を得ることにあったのだ。」
भरद्वाज उवाच