Droṇa-parva Adhyāya 94: Sātyaki–Sudarśana Yuddha (सात्यकि–सुदर्शन युद्ध)
प्रत्युद्यान्ती तमेवैषा कृत्येव दुरधिष्ठिता । जघान चास्थितं वीरं श्रुतायुधममर्षणम्,जैसे दोषयुक्त आभिचारिक क्रियासे उत्पन्न हुई कृत्या उसका प्रयोग करनेवाले यजमानका ही नाश कर देती है, उसी प्रकार उस गदाने लौटकर वहाँ खड़े हुए अमर्षशील वीर श्रुतायुधको मार डाला
その棍棒は彼自身へと反転し、あたかも過ちある呪詛の行によって生じ、制し難いクリティヤが施主を滅ぼすように、そこに立つ怒りを抑えぬ勇士シュルターユダを打ち倒した。
संजय उवाच