Droṇasya raudra-prayogaḥ
Droṇa’s intensified assault and the Pāṇḍava response
वातोद्धूतं रजस्तीव्रं कौशेयनिकरोपमम् । ववर्ष द्यौरनभ्रापि मांसास्थिरुधिराण्युत,इसके बाद प्रचण्ड वायुके वेगसे बड़े जोरकी धूल उठी, जो रेशमी वस्त्रोंके समुदाय-सी प्रतीत होती थी। उस तीव्र एवं भयंकर धूलने सूर्यसहित समूचे आकाशको ढक लिया। आकाशमें मेघोंकी घटा नहीं थी, तो भी वहाँसे मांस, रक्त तथा हड्डियोंकी वर्षा होने लगी
vātoddhūtaṃ rajastīvraṃ kauśeyanikaropamam | vavarṣa dyauranabhrāpi māṃsāsthirudhirāṇy uta ||
サञ्जयは言った。「雲ひとつない空であるのに、烈風に巻き上げられた激しい塵が降りそそぎ、それは絹の塊のように見えた。しかもその無雲の天から、肉と骨と血の忌まわしい雨が落ちた——戦場を暗く染め、戦が底知れぬ恐怖へ沈みゆくことを告げる凶兆であった。」
संजय उवाच