Aśvatthāmā’s Lamentation, Vow of Retaliation, and the Manifestation of the Nārāyaṇāstra (द्रोणपर्व, अध्याय १६६)
के पृष्ठतश्नाप्पयभवन् वीरा वीरान् विनिध्नतः । के पुरस्तादगच्छन्त निध्नन्तः शात्रवान् रणे,कौन-कौन-से योद्धा द्रोणाचार्यके रथके दाहिने पहियेकी रक्षा करते थे और कौन-कौन- से बायें पहियेकी? कौन-कौन-से वीर वीरोंका वध करनेवाले द्रोणाचार्यके पृष्ठभागके रक्षक थे और रणमें शत्रुसैनिकोंका संहार करनेवाले कौन-कौन-से योद्धा आचार्यके आगे-आगे चलते थे?
sañjaya uvāca | ke pṛṣṭhataḥ nāppayabhavan vīrā vīrān vinighnataḥ | ke purastād agacchanta nighnantaḥ śātravān raṇe |
サンジャヤは言った。「ドローナの戦車の後方を守ったのは誰か――強敵を討ち伏せる剛勇の士たちは誰であったか。師である彼の前を進み、戦場で前進しつつ敵軍を屠った戦士は誰か。(また同様に、ドローナの戦車の右輪を守ったのは誰で、左輪を守ったのは誰か。)」
संजय उवाच