धृतराष्ट्र–संजय संवादः: कर्ण–घटोत्कचयोर्निशायुद्धवर्णनम्
Dhṛtarāṣṭra–Sañjaya Dialogue: Description of the Night Engagement of Karṇa and Ghaṭotkaca
ससत्त्वा गतसत्त्वाश्न प्रभया परया युता: । सजीवा इव लक्ष्यन्ते गतसत्त्वा नराधिपा:,कितने ही राजाओंके प्राण चले गये हैं और कितनोंके प्राण अभी नहीं निकले हैं। जिनके प्राण निकल गये हैं, वे नरेश भी अत्यन्त कान्तिसे प्रकाशित होनेके कारण जीवित- से दिखायी देते हैं
その中には、すでに命尽きた者もいれば、まだ息の残る者もいる。だが命を失った王たちでさえ、ひときわ強い光彩に包まれているため、生きているかのように見える。
श्रीकृष्ण उवाच