Kurukṣetra–Sarasvatī Tīrtha-Māhātmya
Pilgrimage Merits and Sacred Geography
अथापश्यन्महात्मान देवर्षि तत्र नारदम् । दीप्यमानं श्रिया ब्राह्म्या हुतार्चिषमिवानलम्,इतनेमें ही उन्होंने देखा, महात्मा देवर्षि नारद वहाँ उपस्थित हैं, जो अपने ब्राह्म तेजसे देदीप्यमान हो घीकी आहुतिसे प्रज्वलित हुई अग्निके समान प्रकाशित हो रहे हैं
वैशम्पायन उवाच