Damayantī’s Lament, Serpent-Seizure, Rescue by the Hunter, and the Curse
सा शड्कमाना तत् पापं चिकीर्षन्ती च तत्प्रियम् । नलं च हृतसर्वस्वमुपलभ्येदमब्रवीत्,उसके मनमें यह आशंका हो गयी कि राजापर बहुत बड़ा कष्ट आनेवाला है। वह उनका प्रिय एवं हित करना चाहती थी। अत: महाराजके सर्वस्वका अपहरण होता जान धायको बुलाकर (इस प्रकार बोली)
बृहृदश्चव उवाच