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Shloka 33

धृतराष्ट्र–संजय संवादः

Dhṛtarāṣṭra and Sañjaya on Arjuna’s Indraloka report and the political consequences

शक्रतुल्यं रणे शूरं सदौदार्यगुणान्वितम्‌ | पार्थ प्रार्थय सुश्रोणि त्वमित्येवं तदाब्रवीत्‌,'सुश्रोणि! जो संग्राममें इन्द्रके समान पराक्रमी और उदारता आदि गुणोंसे सदा सम्पन्न हैं, उन कुन्तीनन्दन अर्जुनकी सेवा तुम स्वीकार करो।” इस प्रकार चित्रसेनने मुझसे कहा था

अर्जुन उवाच