भाईके शोकसे उनका हृदय संतप्त हो उठा। साथ ही प्याससे भी वे बहुत कष्ट पा रहे थे; अतः पानीकी ओर दौड़े। उसी समय आकाशवाणी बोल उठी-- ।। मा तात साहसं कार्षीमम पूर्वपरिग्रह: । प्रश्नानुक्त्वा यथाकामं पिबस्व च हरस्व च,“तात! पानी पीनेका साहस न करो। यहाँ पहलेसे ही मेरा अधिकार हो चुका है। तुम पहले मेरे प्रश्नोंका उत्तर दे दो, फिर इच्छानुसार जल पीओ और साथ ले भी जाओ”
mā tāta sāhasaṁ kārṣīr mamā pūrva-parigrahaḥ | praśnān uktvā yathākāmaṁ pibasva ca harasva ca ||
The Yakṣa spoke: “Dear one, do not act rashly. This water has already been claimed by me. First answer my questions; then, as you wish, drink the water—and you may even take it away.”
यक्ष उवाच