Ritual Acclamation at Hastināpura and Karṇa’s Vow Concerning Arjuna (राजकीय स्तुति-प्रसङ्गः कर्णप्रतिज्ञा च)
दिष्ट्या लोके पुमानस्ति कश्रिदस्मत्प्रिये स्थित: । येनास्माकं हृतो भार आसीनानां सुखावह:,'सौभाग्यकी बात है कि संसारमें कोई ऐसा भी पुरुष है, जो हमलोगोंके प्रिय एवं हितसाधनमें लगा हुआ है। उसने हमलोगोंका भार उतार दिया और हमें बैठे-ही-बैठे सुख पहुँचाया है
वैशम्पायन उवाच