निवातकवचवधः — Arjuna’s Neutralization of the Nivātakavacas
Vajra-astra deployment
त्वया हि तीर्थेषु पुरा समाप्लाव: कृतोडसकृत् । तपश्चेदं महत् तप्तं स्वर्ग गन्तासि पाण्डव,'पाण्डुनन्दन! तुमने पहले अनेक बार बहुत-से तीर्थोमें स्नान किया है और इस समय इस महान् तपका भी अनुष्ठान कर लिया है, अतः तुम स्वर्गलोकमें सशरीर जानेके अधिकारी हो गये हो
अजुन उवाच