Adhyāya 136: Yavakrī–Bharadvāja Saṃvāda and the Bāladhī–Dhanuṣākṣa Gāthā
Arrogance, Boons, and Nimitta
यवक्रीत उवाच नायं शक््यस्त्वया बद्धुं महानोघस्तपोधन । अशक्याद विनिवर्तस्व शक््यमर्थ समारभ,यवक्रीतने कहा--तपोधन! यहाँ अगाध जलराशि भरी है; अतः तुम पुल बाँधनेमें सफल नहीं हो सकोगे। इसलिये इस असम्भव कार्यसे मुँह मोड़ लो और ऐसे कार्यमें हाथ डालो जो तुमसे हो सके
यवक्रीत उवाच