Prabhāsa-tīrthe Vṛṣṇi–Pāṇḍava-saṅgamaḥ; Halī Rāmasya dharma-vimarśaḥ
Meeting at Prabhāsa and Balarāma’s Reflection on Dharma
सत्रे समृद्धेडतिरथस्य राज्ञो वेदीतलादुत्पतिता सुता या । सेयं वने वासमिमं सुदुःखं कथं सहत्यद्य सती सुखाहा,जो अतिरथी राजा द्रुपदके समृद्धिशाली यज्ञमें वेदीसे प्रकट हुई थी, वही यह सुख भोगनेके योग्य सती-साध्वी द्रौपदी वनवासके इस महान् दुःखको कैसे सहन करती है?
बलदेव उवाच