चन्द्रोदयनिभं रम्यं विमानमधिरोहति । चन्द्ररश्मिप्रतीकाशैह्यैर्युक्ते मनोजवै:,आठवें पारणमें मनुष्य राजसूय यज्ञका फल पाता है। वह मनके समान वेगशाली और चन्द्रमाकी किरणोंके समान रंगवाले श्वेत घोड़ोंसे जुते हुए चन्द्रोदयतुल्य रमणीय विमानपर आरूढ़ होता है
वैशम्पायन उवाच