Svargārohaṇa-parva Adhyāya 5 — Karmaphala-Nirdeśa and Phalāśruti (कर्मफलनिर्देशः फलश्रुतिश्च)
यश्नेदं श्रावयेद् विद्वान् सदा पर्वणि पर्वणि । धूतपाप्मा जितस्वर्गो ब्रह्म भूयाय कल्पते,जो दिद्वान् प्रत्येक पर्वपर सदा इसे दूसरोंको सुनाता है उसके सारे पाप धुल जाते हैं। उसका स्वर्गपर अधिकार हो जाता है, तथा वह ब्रह्मभावकी प्राप्तिके योग्य बन जाता है
वैशम्पायन उवाच