स्वर्गारोहणपर्व — तृतीयोऽध्यायः
Indra and Dharma’s Consolation; Celestial Gaṅgā Purification
स्वपक्ष्याश्वैव ये तुभ्यं पार्थिवा निहता रणे । सर्वे स्वर्गमनुप्राप्तास्तान् पश्य भरतर्षभ,'पुरुषसिंह! आओ, वे सभी पापसे मुक्त हो गये हैं। भरतश्रेष्ठ! तुम्हारे पक्षके जो-जो राजा युद्धमें मारे गये हैं वे सभी स्वर्गलोकमें आ पहुँचे हैं। चलो, उनका दर्शन करो
वैशम्पायन उवाच