आयोधनदर्शनम्
Viewing the Battlefield of Kurukṣetra
उत्कृत्तशिरस श्षान्यान् विजग्धान् मृगपक्षिभि: । दृष्टवा काश्चिन्न जानन्ति भर्तुन् भरतयोषितः,“कितनी ही लाशोंके सिर कटकर गायब हो गये हैं, कितनोंको मांसभक्षी पशुओं और पक्षियोंने खा डाला है; अतः: उनको देखकर भी ये हमारे ही पति हैं, इस रूपमें भरतकुलकी स्त्रियाँ पहचान नहीं पाती हैं
वैशम्पायन उवाच