आयोधनदर्शनम्
Viewing the Battlefield of Kurukṣetra
एतदेवंविधं वीर सम्पश्यायोधनं विभो । पश्यमाना हि दह्यामि शोकेनाहं जनार्दन,“कहीं वीरोंकी भुजाओंसे छोड़ी गयी शक्तियाँ पड़ी हैं, कहीं परिघ, नाना प्रकारके तीखे खड्ग और बाणसहित घनुष गिरे हुए हैं। कहीं झुंड-के-झुंड मांसभक्षी जीव-जन्तु आनन्दमग्न होकर एक साथ खड़े हैं, कहीं वे खेल रहे हैं और कहीं दूसरे-दूसरे जन्तु सोये पड़े हैं। वीर! प्रभो! इस प्रकार इन सबसे भरे हुए युद्धस्थलको देखो। जनार्दन! मैं तो इसे देखकर शोकसे दग्ध हुई जाती हूँ
etad evaṃvidhaṃ vīra sampaśyāyodhanaṃ vibho | paśyamānā hi dahyāmi śokenāhaṃ janārdana ||
“O hero, O mighty one—look upon this battlefield, so filled with such sights. As I behold it, O Janārdana, I am consumed and scorched by grief.”
वैशम्पायन उवाच