Plakṣaprasravaṇa–Kārapacana tīrtha-varṇana and Nārada’s war briefing (Śalya-parva, Adhyāya 53)
ऋषय ऊचु: पुरा किल कुरुं राम कर्षन्तं सततोत्थितम् | अभ्येत्य शक्रस्त्रिदिवात् पर्यपूच्छत कारणम्,ऋषि बोले--राम! सुना जाता है कि पूर्वकालमें सदा प्रत्येक शुभ कार्यके लिये उद्यत रहनेवाले कुरु जब इस क्षेत्रको जोत रहे थे, उस समय इन्द्रने स्वर्गसे आकर इसका कारण पूछा
राम उवाच