अध्याय ४ — दुर्योधनस्य असंधि-निश्चयः
Duryodhana’s Refusal of Reconciliation
वधे चैव परो धर्मस्तथाधर्म: पलायने । ते सम घोरां समापन्ना जीविकां जीवितार्थिन:,'युद्धमें शत्रुकोी मारना या उसके हाथसे मारा जाना दोनों ही उत्तम धर्म है और युद्धसे भागनेपर महान् पाप होता है। सभी क्षत्रिय जीवन-निर्वाहकी इच्छा रखते हुए उसी घोर जीविकाका आश्रय लेते हैं
संजय उवाच