Trita in the Well (Udapāna-kathā) — Balarāma’s Tīrtha Observances
सरस्वत्या वरे तीर्थे उन्मज्जन् शशलक्षण: । पुनर्वर्थिष्यते देवास्तद् वै सत्यं वचो मम,“यदि चन्द्रमा अपनी सभी पत्नियोंके प्रति सदा समान बर्ताव करें और सरस्वतीके श्रेष्ठ तीर्थमें गोता लगायें तो वे पुनः बढ़कर पुष्ट हो जायँगे। देवताओ! मेरी यह बात अवश्य सच होगी
वैशम्पायन उवाच