कृपोपदेशः — द्रौणेरनिद्रा च
Kṛpa’s Counsel and Drauṇi’s Sleepless Resolve
त्वं हि शक्तो रणे जेतुं पज्चालानां वरूथिनीम् | दैत्यसेनामिव क्रुद्ध: सर्वदानवसूदन:,जैसे सम्पूर्ण दानवोंका संहार करनेवाले इन्द्र कुपित होनेपर दैत्योंकी सेनाको जीत लेते हैं, उसी प्रकार तुम भी रणभूमिमें पांचालोंकी विशाल वाहिनीपर विजय पानेमें समर्थ हो
कृप उवाच