Karṇa-parva Adhyāya 20 — Yudhiṣṭhira–Duryodhana Encounter and Escalation of Arms
इस प्रकार श्रीमह्या भारत कर्णपर्वमें पाण्ड्यवधविषयक बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ २० ॥। अपन बक। है २ >> - बाणोंकी दस गतियाँ बतायी गयी हैं, जो इस प्रकार हैं--१-उन्मुखी, २-अभिमुखी, ३-तिर्यक्, ४-मन्दा, ५-गोमूत्रिका, ६-ध्रुवा, ७-स्खलिता, ८-यमकाक्रान्ता, ९-क्रुष्टा और १०-अतिक्कुष्टा। इनमेंसे पूर्वकी तीन गतियाँ क्रमश: मस्तक, हृदय तथा पार्शवंदेशका स्पर्श करनेवाली हैं। अर्थात् उन्मुखी गतिसे छोड़ा हुआ बाण मस्तकपर, अभिमुखी गतिसे प्रेरित बाण वक्ष:स्थलपर और तिर्यक्ू-गतिसे चलाया हुआ बाण पार्श्वभागमें आघात करता है। मन्दा गतिसे छोड़े गये बाण त्वचाको कुछ-कुछ छेद पाते हैं। गोमूत्रिका गतिसे चलाये गये बाण बायें और दायें दोनों ओर जाते तथा कवचको भी काट देते हैं। ध्रुवा गति निश्चितरूपसे लक्ष्यका भेदन करानेवाली होती है। स्खलिता कहते हैं, लक्ष्यसे विचलित होनेवाली गतिको। उसके द्वारा संचालित बाण लक्ष्यभ्रष्ट होते हैं। यमकाक्रान्ता वह गति है, जिसके द्वारा प्रेरित बाण बारंबार लक्ष्य वेधकर निकल जाते हैं। क्रुष्टा उस गतिका नाम है, जो लक्ष्यके एक अवयव भुजा आदिका छेदन करती है। दसवीं गतिका नाम है अतिक्रुष्टा; जिसके द्वारा चलाया गया बाण शत्रुका मस्तक काटकर उसके साथ ही दूर जा गिरता है। (नीलकण्ठीके आधारपर) एकविशो< ध्याय: कौरव-पाण्डव-दलोंका भयंकर घमासान युद्ध धृतराष्ट्र रवाच पाण्ड्ये हते किमकरोदर्जुनो युधि संजय । एकवीरेण कर्णेन द्रावितेषु परेषु च,धृतराष्ट्रने पूछा--संजय! जब युद्धस्थलमें अश्वत्थामाद्वारा पाण्ड्यनरेश मार डाले गये और मेरे पक्षके अद्वितीय वीर कर्णने जब शत्रुसैनिकोंको मार भगाया, उस समय अर्जुनने क्या किया?
sañjaya uvāca | iti prakāraṃ śrīmahābhārate karṇaparvaṇi pāṇḍyavadha-viṣayakaḥ viṃśatitamo 'dhyāyaḥ samāptaḥ || 20 ||
Sanjaya said: “Thus, in the revered Mahābhārata, within the Karṇa Parva, the twentieth chapter—concerning the slaying of the Pāṇḍya king—comes to an end.”
संजय उवाच