Sātyaki’s Assurance and the Protection of Dharmarāja (सात्यकिवचनम्—धर्मराजरक्षणविचारः)
जैत्रै: सांग्रामिकैर्मन्त्रै: पूर्वमेव रथोत्तमम् अभिमन्त्रितमर्चिष्मानुदयं भास्करो यथा,उस उत्तम रथको पहलेसे ही विजयसाधक युद्धसम्बन्धी मन्त्रोंद्वारा अभिमन्त्रित किया गया था। उसपर आरूढ़ हुए तेजस्वी अर्जुन उदयाचलपर चढ़े हुए सूर्यके समान जान पड़ते थे
संजय उवाच