Droṇa-parva Adhyāya 45: Saubhadra–Lakṣmaṇa-saṃyoga and Kaurava Counter-Encirclement
महाग्राहगृहीतेव वातवेगभयार्दिता । समकम्पत सा सेना विश्रष्टा नौरिवार्णवे,जिसका समुद्रमें मार्ग भूल गया हो, जो वायुके वेगसे भयाक्रान्त हो रही हो तथा जिसे किसी बहुत बड़े ग्राहने पकड़ लिया हो--ऐसी नौका जैसे डगमगाने लगती है, उसी प्रकार वह सेना अभिमन्युके भयसे काँप रही थी
संजय उवाच