पीडयन्त्यधिकं लोक॑ यस्मात् ते वरदर्पिता: । इन्द्रसहित सम्पूर्ण देवताओंने महात्मा भगवान् शंकरसे कहा--'प्रभो! ब्रह्माजीसे वरदान पाकर ये त्रिपुरनिवासी घोर दैत्य सम्पूर्ण जगत्को अधिकाधिक पीड़ा दे रहे हैं; क्योंकि वरदान प्राप्त होनेसे उनका घमंड बहुत बढ़ गया है
व्यास उवाच