संजय उवाच जानन् पितुः: स निधन सिंहलाड्गूलकेतन: । सक्रोधो भयमुत्सूज्य सो$भिदुद्राव पार्षतम्,संजयने कहा--राजन! अभश्वत्थामाकी ध्वजा-पताकामें सिंहकी पूँछका चिह्न बना हुआ था। उसने पिताके मारे जानेकी घटनाका स्मरण करके कुपित हो भय छोड़कर धृष्टद्युम्नपर धावा किया
संजय उवाच