संजय उवाच एवमुक््त्वा महाबाहुहैंडिम्बिर्वरवीरहा । अभ्ययात् तुमुले कर्ण तव सैन्यं विभीषयन्,संजय कहते हैं--राजन! श्रेष्ठ वीरोंका संहार करनेवाला महाबाहु हिडिम्बाकुमार ऐसा कहकर उस भयंकर युद्धमें आपकी सेनाको भयभीत करता हुआ कर्णका सामना करनेके लिये गया
संजय उवाच