श्रीवायुदेव उवाच पश्यामि कर्ण कौन्तेय देवराजमिवाहवे । विचरन्तं नरव्याप्रमतिमानुषविक्रमम्,भगवान् श्रीकृष्णने कहा--कुन्तीनन्दन! आज युद्धस्थलमें मैं पुरुषसिंह कर्णको देवराज इन्द्रके समान अमानुषिक पराक्रम प्रकट करते और विचरते देख रहा हूँ
श्रीवायुदेव उवाच