धृष्टद्युम्नस्य द्रोणाभिमुख्यं तथा सात्यकि-कर्ण-समागमः
Dhṛṣṭadyumna’s advance toward Droṇa and the Sātyaki–Karṇa confrontation
संजय उवाच उत्थित: स तु शैनेयो विमुक्त: सौमदत्तिना । खड्गमादाय चिच्छित्सु: शिरस्तस्य महात्मन:,संजय कहते हैं--राजन्! सोमदत्तकुमार भूरिश्रवाके छोड़ देनेपर शिनिपौत्र सात्यकि उठकर खड़े हो गये। फिर उन्होंने तलवार लेकर महामना भूरिश्रवाका सिर काट लेनेका निश्चय किया
संजय उवाच