भीष्मपर्व — अध्याय २: संजयस्य दिव्यदृष्टिप्रदानम् तथा निमित्तवर्णनम्
Granting Sañjaya Divine Sight and the Description of Omens
वैशम्पायन उवाच एतस्मिन् नेच्छति द्रष्टूं संग्रामं श्रोतुमिच्छति । वराणामीश्वरो व्यास: संजयाय वरं ददौ,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! व्यासजीने देखा, धृतराष्ट्र युद्धका दृश्य देखना तो नहीं चाहता, परंतु उसका पूरा समाचार सुनना चाहता है। तब वर देनेमें समर्थ उन महर्षिने संजयको वर देते हुए कहा--
वैशम्पायन उवाच