भीष्मपर्व — अध्याय २: संजयस्य दिव्यदृष्टिप्रदानम् तथा निमित्तवर्णनम्
Granting Sañjaya Divine Sight and the Description of Omens
यदि चेच्छसि संग्रामे द्रष्टमेतान् विशाम्पते । चक्षुर्ददानि ते पुत्र युद्ध तत्र निशामय,राजन! यदि संग्रामभूमिमें इन सबकी अवस्था तुम देखना चाहो तो मैं तुम्हें दिव्य नेत्र प्रदान करूँ। वत्स! फिर तुम (यहाँ बैठे-बैठे ही) वहाँ होनेवाले युद्धका सारा दृश्य अपनी आँखों देखो
व्यास उवाच