Mind as Charioteer; Kṣetrajña, Tapas, and Dhyāna-Yoga
Adhyātma-Upadeśa
व्यक्त: सत्त्वगुणस्त्वेवं पुरुषोडव्यक्त इष्यते । एतद् विप्रा विजानीत हन्त भूयो ब्रवीमि व:,ब्रह्माजीका ऋषियोंको उपदेश इस प्रकार सत्त्वगुण तो व्यक्त है और पुरुष अव्यक्त माना गया है। ब्रह्मर्षियो! इस तत्त्वको समझो। अब मैं तुमलोगोंसे आगेकी बात बताता हूँ
वायुदेव उवाच