महाभिष-गङ्गा-दर्शनं वसूनां शापकथनं च
Mahābhiṣa Encounters Gaṅgā; The Vasus Explain Their Curse
इति दद्यामिति यज इत्यधीय इति व्रतम् । इत्येतानि भयान्याहुस्तानि वर्ज्यानि सर्वश:,मैं यह दे सकता हूँ, इस प्रकार यजन करता हूँ, इस तरह स्वाध्यायमें लगा रहता हूँ और यह मेरा व्रत है; इस प्रकार जो अहंकारपूर्वक वचन हैं, उन्हें भयरूप कहा गया है। ऐसे वचनोंको सर्वथा त्याग देना चाहिये
अष्टक उवाच