अध्याय ७४: अक्रोध–क्षमा–निवासनीति
Chapter 74: Non-anger, Forbearance, and the Ethics of Residence
त्ववज्भेभ्य: प्रसूतो5यं पुरुषात् पुरुषो5पर: । सरसीवामले&5त्मानं द्वितीयं पश्य वै सुतम्,“यह बालक आपके अंगोंसे उत्पन्न हुआ है; मानो एक पुरुषसे दूसरा पुरुष प्रकट हुआ है। निर्मल सरोवरमें दिखायी देनेवाले प्रतिबिम्बकी भाँति अपने द्वितीय आत्मारूप इस पुत्रको देखिये
दुष्यन्त उवाच