Garuḍa’s Breach of the Amṛta-Guard and Boons with Viṣṇu; Encounter with Indra (Ādi-parva, Adhyāya 29)
विभागं बहवो मोहात् कर्तुमिच्छन्ति नित्यश: । ततो विभक्तास्त्वन्योन्यं विक्रुध्यन्तेडर्थमोहिता:,'भाई! बहुत-से मनुष्य मोहवश सदा धनका बँटवारा कर लेनेकी इच्छा रखते हैं। तदनन्तर बँटवारा हो जानेपर धनके मोहमें फँसकर वे एक-दूसरेके विरोधी हो परस्पर क्रोध करने लगते हैं
कश्यप उवाच