पाण्डोः प्रेतकार्य-सम्पादनम्
Pāṇḍu’s Funeral Rites and Public Mourning
वैशम्पायन उवाच राजा पाण्डुर्महारण्ये मृगव्यालनिषेविते । चरन् मैथुनधर्मस्थं ददर्श मृगयूथपम्,वैशम्पायनजी बोले--जनमेजय! एक समय राजा पाण्डु मृगों और सर्पोंसे सेवित विशाल वनमें विचर रहे थे। उन्होंने मृगोंके एक यूथपतिको देखा, जो मृगीके साथ मैथुन कर रहा था
वैशम्पायन उवाच