मარკण्डेयागमनम् तथा सत्यव्रत-उपदेशः
Arrival of Mārkaṇḍeya and Counsel on Truth-Vows
कर्णश्रवाश्न मुज्जश्न लवणाश्वश्न॒ काश्यप: । हारीतः स्थूणकर्णश्र अग्निवेश्योडथ शौनक:,द्वैपायन व्यास, नारद, परशुराम, पृथुश्रवा, इन्द्रद्ममम, भालुकि, कृतचेता, सहस्रपात्, कर्णश्रवा, मुंज, लवणाश्व, काश्यप, हारीत, स्थूणकर्ण, अग्निवेश्य, शौनक, कृतवाक्, सुवाक्, बृहदश्वच, विभावसु, ऊध्वरेता, वृषामित्र, सुहोत्र तथा होत्रवाहन--ये सब ब्रह्मर्षि तथा राजर्षिगण और दूसरे कठोर व्रतका पालन करनेवाले बहुत-से ब्राह्मण अजातशत्रु युधिष्ठिरका उसी प्रकार आदर करते थे, जैसे महर्षि लोग देवराज इन्द्रका
vaiśampāyana uvāca | karṇaśravāś ca muñjaś ca lavaṇāśvaś ca kāśyapaḥ | hārītaḥ sthūṇakarṇaś cāgniveśyo 'tha śaunakaḥ ||
Vaiśampāyana berkata: “Karṇaśravā, Muñja, Lavaṇāśva, Kāśyapa, Hārīta, Sthūṇakarṇa, Agniveśya, dan Śaunaka—mereka pun hadir di sana.”
वैशम्पायन उवाच