अध्याय १४९ — हनूमतो महद्रूपदर्शनं तथा धर्म-नीति-उपदेशः
Hanūmān’s Vast Form and Instruction on Dharma–Statecraft
दग्ध्वा लड़कामशेषेण साट्टप्राकारतोरणाम् । प्रत्यागतश्वास्य पुनर्नाम तत्र प्रकाश्य वै,भरतश्रेष्ठ) मगर और ग्राह आदिसे भरे हुए उस समुद्रको अपने पराक्रमसे पार करके मैं रावणके नगरमें देवकन्याके समान तेजस्विनी जनकराजनन्दिनी सीतासे मिला। रघुनाथजीकी प्रियतमा विदेहराजकुमारी सीता-देवीसे भेंट करके अट्टालिका, चहारदिवारी और नगर-द्वारसहित समूची लंकापुरीको जलाकर वहाँ श्रीराम-नामकी घोषणा करके मैं पुन: लौट आया
dagdhvā laṅkām aśeṣeṇa sāṭṭa-prākāra-toraṇām | pratyāgataś cāsya punar nāma tatra prakāśya vai ||
Waiśampāyana berkata: “Setelah membakar Laṅkā hingga tuntas—beserta menara-menara, benteng, dan gerbang-gerbangnya—dan setelah memaklumkan di sana nama Rāma, aku pun kembali.”
वैशम्पायन उवाच