Sukta 2.34
पृक्षे ता विश्वा भुवना ववक्षिरे मित्राय वा सदमा जीरदानवः । पृषदश्वासो अनवभ्रराधस ऋजिप्यासो न वयुनेषु धूर्षदः ॥
pṛkṣé tā́ viśvā́ bhúvanā vavakṣire mitrā́ya vā sád amā́ jīrá-dānavaḥ | pṛ́ṣad-aśvāso anavabhra-rā́dhasa ṛjipyā́so ná vayúneṣu dhū́ḥ-sadaḥ ||
मरुत देवता पूरी दुनिया को अपनी ताकत से संभालते हैं। वो मित्र बन के सबके साथ चलते हैं और साथ में रहते हैं। इनके घोड़े चितकबरे रंग के हैं और इनके पास जो कुछ है वो साफ और साफ है। वो सीधा रास्ता पकड़ के चलते हैं और सही फैसला लेते हैं।
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