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Sukta 2.34
Gṛtsamada (Gṛtsamada Bhārgava) (traditional attribution for RV 2.34)
Maruts (Rudriyas)
Triṣṭubh (probable for RV 2.34; each pāda ~11 syllables)
This hymn praises the Maruts as fierce, luminous storm-powers who rush like wild beings, blaze like fires, and drive away obstruction to release the hidden “rays/cows” of light. It petitions them to come near with protection, prosperity, and right-mindedness, especially for the sacrificer who offers oblation. The tone moves from vivid epithets of their might to a direct prayer for their saving aid that carries one beyond distress and blame.
Mantra 1
धारावरा मरुतो धृष्ण्वोजसो मृगा न भीमास्तविषीभिरर्चिनः । अग्नयो न शुशुचाना ऋजीषिणो भृमिं धमन्तो अप गा अवृण्वत ॥
मरुत देवता अपनी ताकत बरसाते हैं जैसे बारिश की धार। वो इतने ताकतवर हैं कि डर लगता है, जैसे जंगल का कोई डरावना जानवर। उनकी चमक आग की तरह है जो जल रही हो। वो आगे बढ़ते हैं और रास्ता साफ करते हैं। रास्ते में जो रुकावट है उसे हटा देते हैं और छुपी हुई चीज़ें सामने ला देते हैं।
Mantra 2
द्यावो न स्तृभिश्चितयन्त खादिनो व्यभ्रिया न द्युतयन्त वृष्टयः । रुद्रो यद्वो मरुतो रुक्मवक्षसो वृषाजनि पृश्न्याः शुक्र ऊधनि ॥
मरुत देवता आसमान की तरह अपनी ताकत बना के खड़े हैं। बादल बिखरने लगते हैं और बिजली चमकती है, वैसे ही वो चमक उठाते हैं। रुद्र ने इन्हें पैदा किया था। रुद्र की सोच थी कि इनमें ताकत भरे। इनकी चमक सोने जैसी है और इनमें जो ताकत है वो चमक-दमक वाली है।
Mantra 3
उक्षन्ते अश्वाँ अत्याँ इवाजिषु नदस्य कर्णैस्तुरयन्त आशुभिः । हिरण्यशिप्रा मरुतो दविध्वतः पृक्षं याथ पृषतीभिः समन्यवः ॥
मरुत देवता अपने घोड़ों को रेस में दौड़ने वाले घोड़ों की तरह भागते हैं। उनके घोड़े तेज़ी से आगे बढ़ते हैं। मरुत देवता सोने जैसी चमक वाले हैं और उनमें ताकत का उबाल है। वो चितकबरे घोड़ों पर सवार हैं और सब मिलकर एक ही काम के लिए तैयार हैं।
Mantra 4
पृक्षे ता विश्वा भुवना ववक्षिरे मित्राय वा सदमा जीरदानवः । पृषदश्वासो अनवभ्रराधस ऋजिप्यासो न वयुनेषु धूर्षदः ॥
मरुत देवता पूरी दुनिया को अपनी ताकत से संभालते हैं। वो मित्र बन के सबके साथ चलते हैं और साथ में रहते हैं। इनके घोड़े चितकबरे रंग के हैं और इनके पास जो कुछ है वो साफ और साफ है। वो सीधा रास्ता पकड़ के चलते हैं और सही फैसला लेते हैं।
Mantra 5
इन्धन्वभिर्धेनुभी रप्शदूधभिरध्वस्मभिः पथिभिर्भ्राजदृष्टयः । आ हंसासो न स्वसराणि गन्तन मधोर्मदाय मरुतः समन्यवः ॥
मरुत देवता आग की तरह ताकत ले के आते हैं। उनके पास वो पानी है जो दूध देता है और ताकत देता है। वो अपने रास्ते पर चमक के साथ आते हैं। जैसे हंस पानी में जाते हैं, वैसे ही ये भी अपनी जगह पर आते हैं। ये सब मिलकर एक ही इरादे से आते हैं और मीठा रस ले के आते हैं।
Mantra 6
आ नो ब्रह्माणि मरुतः समन्यवो नरां न शंसः सवनानि गन्तन । अश्वामिव पिप्यत धेनुमूधनि कर्ता धियं जरित्रे वाजपेशसम् ॥
मरुत देवता, हमारे पास आओ। हमारे मंत्र सुनो, जैसे कोई योद्धा की तारीफ सुनता है। आप लोग एक मन से आओ, जैसे एक टीम काम करती है। एक गाय का दूध निकालना, वैसे ही आप ताकत भर दो। हमें वो सोच दो जो ताकत से भरी हो। गाने वाले के लिए ऐसा बनाओ।
Mantra 7
तं नो दात मरुतो वाजिनं रथ आपानं ब्रह्म चितयद्दिवेदिवे । इषं स्तोतृभ्यो वृजनेषु कारवे सनिं मेधामरिष्टं दुष्टरं सहः ॥
मरुत देवता, हमें वो दो जो ताकत में रखता है। एक रथ दो जो ताकत से भरा हो। जो चीज़ हमें रोज़ ताकत दे, वो भी दो। गाने वाले लोगों को जीतने की ताकत दो। बुद्धि दो जो कभी खराब न हो। ताकत दो जो कोई तोड़ न सके।
Mantra 8
यद्युञ्जते मरुतो रुक्मवक्षसोऽश्वान्रथेषु भग आ सुदानवः । धेनुर्न शिश्वे स्वसरेषु पिन्वते जनाय रातहविषे महीमिषम् ॥
जब मरुत देवता अपने रथ में घोड़े जोड़ते हैं, तब भाग्य आता है। उनकी छाती पे सोना चमकता है, वो लोग अच्छे तोहफे ले कर आते हैं। जैसे गाय अपने बच्चे को दूध पिलाती है, वैसे ही वो लोग देते हैं। जो लोग भगवान को पूजा करते हैं, उनको बड़ी ताकत मिलती है।
Mantra 9
यो नो मरुतो वृकताति मर्त्यो रिपुर्दधे वसवो रक्षता रिषः । वर्तयत तपुषा चक्रियाभि तमव रुद्रा अशसो हन्तना वधः ॥
मरुत देवता, अगर कोई दुश्मन हमारे पे वार करे, उसे रोकना। वो बुरी तरह से हमारे पीछे पड़े हो तो, उस्से बचाओ। उसकी ताकत को वापस करो, उसे जला दो। रुद्र देवता, उस झूठा आदमी को मारो जो लोगों को मारता है।
Mantra 10
चित्रं तद्वो मरुतो याम चेकिते पृश्न्या यदूधरप्यापयो दुहुः । यद्वा निदे नवमानस्य रुद्रियास्त्रितं जराय जुरतामदाभ्याः ॥
मरुत देवता, तुम्हारा काम अजब है। जब पृश्नि माता से पानी निकलता है, वो बड़ी बात है। जब कोई बुरी बात होती है, तब तुम लोग उस्से ठीक करते हो। त्रित नाम का रिशि बूढ़ा हो रहा था, तुमने उसे जवान बना दिया। तुम लोग इतने ताकतवाले हो, कोई तुम्हे हरा नहीं सकता।
Mantra 11
तान्वो महो मरुत एवयाव्नो विष्णोरेषस्य प्रभृथे हवामहे । हिरण्यवर्णान्ककुहान्यतस्रुचो ब्रह्मण्यन्तः शंस्यं राध ईमहे ॥
मरुत देवताओं को हम बुला रहे हैं। यह हमेशा यंग रहते हैं और आगे बढ़ते हैं। विष्णु की शक्ति उनको धक्का देती है। इनका रंग सोना जैसा चमकता है। यह ऊपर से पानी गिराते हैं और आग जैसी शक्ति देते हैं। इनसे हम ऐसी दौलत माँगते हैं जो दिल को भर दे।
Mantra 12
ते दशग्वाः प्रथमा यज्ञमूहिरे ते नो हिन्वन्तूषसो व्युष्टिषु । उषा न रामीररुणैरपोर्णुते महो ज्योतिषा शुचता गोअर्णसा ॥
दशग्व रिशियों ने पहले पहले यज्ञ शुरू किया था। वो हमारी सुबह को आगे बढ़ाएँ। जैसे सुबह होती है और लाली आती है, वैसे ही चमक आती है। रोशनी आती है और ज्ञान मिलता है।
Mantra 13
ते क्षोणीभिररुणेभिर्नाञ्जिभी रुद्रा ऋतस्य सदनेषु वावृधुः । निमेघमाना अत्येन पाजसा सुश्चन्द्रं वर्णं दधिरे सुपेशसम् ॥
रुद्र और मरुत देवता सचाई के जगह पर बड़े हो रहे हैं। इनके पास लाल रंग की चमक है और गहने चमक रहे हैं। बादल गरजते हैं और ज़ोर आता है। यह एक खूबसूरत रूप लेते हैं जो चमकता है।
Mantra 14
ताँ इयानो महि वरूथमूतय उप घेदेना नमसा गृणीमसि । त्रितो न यान्पञ्च होतॄनभिष्टय आववर्तदवराञ्चक्रियावसे ॥
हम उनके पास जा रहे हैं जो हमारे लिए बड़ी सुरक्षा हैं। हम उनको नमस्ते करते हैं और उनकी तारीफ करते हैं। जैसे त्रित ने पाँच पंडितों को सही दिशा में मोड़ दिया था, वैसे ही यह शक्तियाँ हमारे काम को सही कर दें और हमारे रक्षा करें।
Mantra 15
यया रध्रं पारयथात्यंहो यया निदो मुञ्चथ वन्दितारम् । अर्वाची सा मरुतो या व ऊतिरो षु वाश्रेव सुमतिर्जिगातु ॥
मरुत देवता, तुम्हारी वो मदद से जो टूटे हुए इंसान को पार ले जाती है, उससे हम भी पार जाएँ। जिसने बुरे लोगों के बीच फंसे इंसान को छुड़ाया, उस तरह हमें भी मदद मिले। तुम्हारी मदद हमारे पास आए और हमारा दिमाग सही काम करे।
The Maruts are Rudra’s storm-companions—bright, roaring, swift chariot-riders. The hymn portrays them as fire-like powers who break obstacles and bring strength, rain-like nourishment, and protection.
In Vedic imagery, “cows” often symbolize rays of light and life-giving abundance. Saying the Maruts uncover them means they drive away concealment and obstruction so light, clarity, and prosperity can emerge.
The hymn asks the Maruts to turn their help toward the worshipper: to carry the afflicted beyond distress, remove constricting blame, and grant ‘sumati’—a steady, auspicious, right-minded guidance.
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