Sukta 10.94
सुते अध्वरे अधि वाचमक्रता क्रीळयो न मातरं तुदन्तः । वि षू मुञ्चा सुषुवुषो मनीषां वि वर्तन्तामद्रयश्चायमानाः ॥
suté adhvaré ádhi vā́cam akrata krīḷáyo ná mātáram tudántaḥ | ví ṣū muñca susu-vúṣo manīṣā́ṃ ví vartantām ádrayaś cā́yamānāḥ ||
जब सोम का रस निकलता है, यज्ञ में तुम आवाज़ डालते हो। जैसे बच्चे खेलते-खेलते अपनी माँ को थपथप करते हैं, वैसे तुम काम करते हो। जो सोच से यह रस निकला है, उसे पूरा छोड़ दो। पत्थर जमा हो के काम करते हैं, वो अपनी जगह घूमते रहते हैं।
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