Sukta 10.85
पूर्वापरं चरतो माययैतौ शिशू क्रीळन्तौ परि यातो अध्वरम् । विश्वान्यन्यो भुवनाभिचष्ट ऋतूँरन्यो विदधज्जायते पुनः ॥
pūrvāparáṃ carato māyáyaitáu śiśū́ krī́ḷantau pári yāto adhvarám | víśvāny anyó bhúvanābhícaṣṭa ṛtū́ṃr anyó vidadháj jā́yate púnaḥ ||
यह दोनों पीछे और आगे चलते हैं, जैसे कोई दिव्य शक्ति चला रही हो। देखो, जैसे दो बच्चे खेलते हुए चक्कर काट रहे हों। एक सारी दुनिया देखता है, दूसरा मौसम ठीक करता है। वह बार-बार पैदा होता है। यह दोनों शक्तियाँ दिखाते हैं कि ज़िन्दगी चलती रहती है और समय में सब सही तरीके से चलता है।
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