Opening the text

Sukta 10.115
Kaṇva (Kāṇva tradition indicated by 10.115.5; hymn as a whole is Kāṇva-associated)
Agni (as child, messenger, establishing power)
Triṣṭubh (typical for Agni hymns in this register; verify by scan)
This Agni hymn praises the fire-god as a wondrous “young child” whose growth surpasses his two Mothers and who at once takes up the great role of messenger between humans and gods. It highlights Agni’s power to establish and protect the ritual order, to carry offerings, and to safeguard singers and seer-leaders—especially the Kaṇva line—culminating in a liturgical rising with the cries of vaṣaṭ and repeated namas.
Mantra 1
चित्र इच्छिशोस्तरुणस्य वक्षथो न यो मातरावप्येति धातवे । अनूधा यदि जीजनदधा च नु ववक्ष सद्यो महि दूत्यं चरन् ॥
देखो कैसे एक छोटा बच्चा इतना तेज़ी से बढ़ता है। वो अपनी दोनों माँ से भी आगे निकल जाता है। जब वो रास्ते पे चलता है, तुरंत एक बड़ा काम लेकर चल पड़ा। वो एक मैसेंजर की तरह काम कर रहा है।
Mantra 2
अग्निर्ह नाम धायि दन्नपस्तमः सं यो वना युवते भस्मना दता । अभिप्रमुरा जुह्वा स्वध्वर इनो न प्रोथमानो यवसे वृषा ॥
अग्नि का नाम रखा गया है क्योंकि वो देता है और काम करता है। वो जंगल को जला के राख बना देता है। पूजा में वो चम्मच से घी डालता है और आगे बढ़ता है। वो एक बैल की तरह ताक़त से खाना पैदा करता है।
Mantra 3
तं वो विं न द्रुषदं देवमन्धस इन्दुं प्रोथन्तं प्रवपन्तमर्णवम् । आसा वह्निं न शोचिषा विरप्शिनं महिव्रतं न सरजन्तमध्वनः ॥
हम उसके लिए प्रयास करते हैं जो पक्का बैठा है। वो सोम है, जैसे समुंदर में लहरें उठती हैं। वो आगे बढ़ता है जैसे कोई आग ले के चल रहा हो। उसकी ताकत दूर तक है। वो अपना काम पक्का कर के चलता है।
Mantra 4
वि यस्य ते ज्रयसानस्याजर धक्षोर्न वाताः परि सन्त्यच्युताः । आ रण्वासो युयुधयो न सत्वनं त्रितं नशन्त प्र शिषन्त इष्टये ॥
जब उसकी आग तेज़ होती है, तो हवा उसके आस-पास घूरती है। वो हिलता नहीं। खुशी भरी ताकत आती है, जैसे योद्धा लड़ने आते हैं। वो आगे बढ़ते हैं, अपना काम पूरा करने के लिए तैयार होते हैं।
Mantra 5
स इदग्निः कण्वतमः कण्वसखार्यः परस्यान्तरस्य तरुषः । अग्निः पातु गृणतो अग्निः सूरीनग्निर्ददातु तेषामवो नः ॥
यह अग्नि है, कण्व रिशियों का सबसे बड़ा साथी। वो अंदर और बाहर सब पार कर देता है। अग्नि गाने वाले की रक्षा करे। रिशियों की भी रक्षा करे। और हमें भी उनकी तरह सुरक्षा दे।
Mantra 6
वाजिन्तमाय सह्यसे सुपित्र्य तृषु च्यवानो अनु जातवेदसे । अनुद्रे चिद्यो धृषता वरं सते महिन्तमाय धन्वनेदविष्यते ॥
अग्नि बहुत ताकत वाला है, वो जीत लेता है। उसका परिवार अच्छा है, चमकदार है। वो अंदर की प्यास में घूरता है। जातवेदस के पीछे चलता है। जब कोई सूखा पड़ता है, फिर भी जो हिम्मत करता है और बड़ा वरदान माँगता है, उसको वो बड़ा देवता मिलता है।
Mantra 7
एवाग्निर्मर्तैः सह सूरिभिर्वसुः ष्टवे सहसः सूनरो नृभिः । मित्रासो न ये सुधिता ऋतायवो द्यावो न द्युम्नैरभि सन्ति मानुषान् ॥
अग्नि चमकता है और अच्छा है। इंसान उसे पूजा करें, ज्ञानी लोगों के साथ। वो ताकत वाला बेटा है जैसे लोगों में कोई बलवान हो। मित्र जैसे जो सच के रास्ते चलते हैं, आसमान जैसे चमकते हैं, वैसे ही वो लोग इंसान के ऊपर खड़े रहते हैं। उसे ऊपर ले जाते हैं रोशनी की तरफ।
Mantra 8
ऊर्जो नपात्सहसावन्निति त्वोपस्तुतस्य वन्दते वृषा वाक् । त्वां स्तोषाम त्वया सुवीरा द्राघीय आयुः प्रतरं दधानाः ॥
हे बालक, तुम शक्ति के हो, बहुत ताकतवर हो। जब लोग सही से तारीफ करते हैं, तो शब्द की जीत तुम्हे नज़र करती है। हम तुम्हे याद करेंगे। तुम्हारी वजह से हम भी बहुत ताकतवर बने। हमारी उम्र लंबी हो और हम आगे बढ़ते रहें।
Mantra 9
इति त्वाग्ने वृष्टिहव्यस्य पुत्रा उपस्तुतास ऋषयोऽवोचन् । ताँश्च पाहि गृणतश्च सूरीन्वषड्वषळित्यूर्ध्वासो अनक्षन्नमो नम इत्यूर्ध्वासो अनक्षन् ॥
अग्नि, वृष्टि-हव्य के बेटे रिशि थे। उन्होंने तुम्हे सही से प्रयास किया और बात की। इन लोग को और जो लोग गाते हैं उन सब को बचा के रखना। वो वषट् वषट् बोल के ऊपर उठ गए। फिर नमो नमो बोल के और भी ऊपर गए।
Because the fire is freshly born when kindled, yet it quickly becomes powerful and effective. The hymn uses this image to show how Agni grows fast and immediately takes up his divine work.
They are commonly understood as the two sources of fire (often heaven and earth, or the two fire-sticks used in kindling). The verse says Agni surpasses his origins and becomes firmly established in his role.
“Vaṣaṭ” is a sacrificial exclamation used to send the offering forth through Agni. “Namo nama” means repeated obeisance, marking reverence and a concluding uplift in the ritual.
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