
Sukta 10.104
Indra (with Soma as offering-substance)
Trishtubh (common for Indra-Soma hymns; likely here)
This hymn is an urgent invitation to Indra—"much-invoked" and borne by the tawny steeds—to come swiftly to the yajña and drink the freshly pressed Soma. It praises Indra as the hearer of prayer, the knower of the rite’s path, and the victorious slayer of obstructing powers (vṛtra-like resistances), sought for aid in struggle and for the winning of wealth, strength, and plenitude.
Mantra 1
असावि सोमः पुरुहूत तुभ्यं हरिभ्यां यज्ञमुप याहि तूयम् । तुभ्यं गिरो विप्रवीरा इयाना दधन्विर इन्द्र पिबा सुतस्य ॥
सोम रस तैयार है, इंद्र के लिए निकाला गया है। इंद्र, जल्दी आओ यहाँ, तुम्हारे बाल और रथ दोनों पियारे हैं। रिशि लोग तुम्हारे लिए गीत गा रहे हैं, उनकी आवाज़ पहुँच रही है। इंद्र, यह रस पियो और ताकत बढ़ाओ।
Mantra 2
अप्सु धूतस्य हरिवः पिबेह नृभिः सुतस्य जठरं पृणस्व । मिमिक्षुर्यमद्रय इन्द्र तुभ्यं तेभिर्वर्धस्व मदमुक्थवाहः ॥
इंद्र, पानी में धोया हुआ सोम रस पियो। यह रस निकलने वाले लोग तुम्हारे लिए तैयार कर रहे हैं, तुम्हारा पेट भर दो। पत्थरों से इस्से पीस के बनाया है, इस्से तुम्हारी खुशी और ताकत बढ़ती है। तुम शक्ति से भरे हो और गीत तुम्हारे साथ हैं।
Mantra 3
प्रोग्रां पीतिं वृष्ण इयर्मि सत्यां प्रयै सुतस्य हर्यश्व तुभ्यम् । इन्द्र धेनाभिरिह मादयस्व धीभिर्विश्वाभिः शच्या गृणानः ॥
मैं इस ताकतवर और सच्चे पीने का काम शुरू करता हूँ। इंद्र, तुम्हारे लिए यह रस निकाला है, तुम्हारे घोड़े भी पियारे हैं। इंद्र, यहाँ आओ और खुश हो जाओ, यह धारा तुम्हे ताकत देती है। सब लोग तुम्हारी ताकत की तारीफ कर रहे हैं।
Mantra 4
ऊती शचीवस्तव वीर्येण वयो दधाना उशिज ऋतज्ञाः । प्रजावदिन्द्र मनुषो दुरोणे तस्थुर्गृणन्तः सधमाद्यासः ॥
इंद्र तुम्हारी मदद से लोग ताकत पाते हैं। जो लोग सच्चे धरम को जानते हैं, वो आदमियों के घर में खड़े हैं। उनके पास संतान और समृद्धि है। वो गाते हैं और खुश हैं, सब मिलकर मिल के खुशी मना रहे हैं।
Mantra 5
प्रणीतिभिष्टे हर्यश्व सुष्टोः सुषुम्नस्य पुरुरुचो जनासः । मंहिष्ठामूतिं वितिरे दधाना स्तोतार इन्द्र तव सूनृताभिः ॥
इंद्र, तुम्हारे भले के लिए लोग तुम्हे फॉलो करते हैं। तुम्हारे घोड़े बड़े चमकदार हैं। लोग तुम्हारी तारीफ करते हैं और तुम्हारी मदद माँगते हैं। तुम उनकी बात सुनते हो और उन्हें बड़ी हेल्प देते हो। तुम्हारी सच्ची बातें उनका सारा काम सीधा कर देती हैं।
Mantra 6
उप ब्रह्माणि हरिवो हरिभ्यां सोमस्य याहि पीतये सुतस्य । इन्द्र त्वा यज्ञः क्षममाणमानड्दाश्वाँ अस्यध्वरस्य प्रकेतः ॥
इंद्र, तुम यहाँ आओ। यह लोग सोम रस निकाल के रखते हैं, तुम उसको पियो। यह पूजा तुम्हे बुला रही है, तुम उनका साथ दो। तुम जानते हो कि यह सब कैसे चलना है। तुम इस रास्ते को साफ कर दो।
Mantra 7
सहस्रवाजमभिमातिषाहं सुतेरणं मघवानं सुवृक्तिम् । उप भूषन्ति गिरो अप्रतीतमिन्द्रं नमस्या जरितुः पनन्त ॥
लोग इंद्र की तारीफ के गाने गाते हैं। इंद्र बहुत ताकत वाला है, दुश्मनों को हराता है। वो सोम रस पीता है और अच्छी बातें करता है। जो लोग उसे पूजा करते हैं, उनका काम बन जाता है। दुश्मन उसके सामने नहीं टिकते।
Mantra 8
सप्तापो देवीः सुरणा अमृक्ता याभिः सिन्धुमतर इन्द्र पूर्भित् । नवतिं स्रोत्या नव च स्रवन्तीर्देवेभ्यो गातुं मनुषे च विन्दः ॥
इंद्र ने बंद दरवाज़े तोड़ के बाहर निकला। उसने सात पानी के धारें ली, जो साफ थी। उसने बड़ा समुंदर पार किया। उसने भगवान के लिए और इंसान के लिए रास्ता बनाया। नवें नदियाँ और नब्बे धारें उसने दिखाई।
Mantra 9
अपो महीरभिशस्तेरमुञ्चोऽजागरास्वधि देव एकः । इन्द्र यास्त्वं वृत्रतूर्ये चकर्थ ताभिर्विश्वायुस्तन्वं पुपुष्याः ॥
इंद्र ने बड़े पानी को आज़ाद किया जो दबा हुआ था। वो अकेला भगवान जाग रहा था उन पानी के ऊपर। इंद्र ने वृत्र नाम के दुश्मन से लड़ाई की थी। उस पानी से तुम अपनी ताकत बढ़ा लो, तुम्हारी जान पूरी दुनिया में फैल जाए।
Mantra 10
वीरेण्यः क्रतुरिन्द्रः सुशस्तिरुतापि धेना पुरुहूतमीट्टे । आर्दयद्वृत्रमकृणोदु लोकं ससाहे शक्रः पृतना अभिष्टिः ॥
इंद्र एक बहादुर देवता है, सब उसकी तारीफ करते हैं। वो ऐसा है कि खुद दूध देने वाली गाय भी उसको बुलाती है। उसने वृत्र नाम का बड़ा दुश्मन को कुचल दिया। उसने पूरी दुनिया को बना दिया। वो बहुत ताकतवर है, लड़ाई में जीतता है।
Mantra 11
शुनं हुवेम मघवानमिन्द्रमस्मिन्भरे नृतमं वाजसातौ । शृण्वन्तमुग्रमूतये समत्सु घ्नन्तं वृत्राणि संजितं धनानाम् ॥
हम अपने भले के लिए इंद्र को बुलाते हैं। वो बहुत दानी है, हमारे काम आता है। वो हमारी सुनता है, मुश्किल में मदद करता है। वो रास्ते के रुकावटों को तोड़ देता है। वो धन जीत कर लाता है।
It calls Indra to come quickly to the sacrifice, drink the freshly pressed Soma, and use that power to remove obstacles and bring victory, strength, and prosperity.
Soma is the ritual offering that “feeds” Indra’s heroic energy. The hymn links the pressed Soma, the sacred words, and Indra’s action as one process that produces protection and success.
Indra can be read as courageous will and clear force, while Soma is uplifting delight and inspiration. The hymn then becomes a prayer to energize inner strength, break resistance, and move toward abundance and right action.
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